बिहार के सीवान सदर अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले दो महीनों में सांप काटने के 76 मरीज पहुंचे। इनमें से 66 उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट गए, जबकि 10 की मौत हो गई।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में सर्पदंश के 52 और सितंबर में 24 मामले आए। बरसात और बाढ़ में खेतों, झाड़ियों और जलजमाव वाले इलाकों में सांपों की गतिविधि बढ़ जाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि सांप काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
